:
Breaking News

Business News: सितंबर की बड़ी गिरावट के बाद अक्टूबर में शेयर बाजार की दिशा पर नजर, एफआईआई और कच्चा तेल अहम

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | सितंबर में शेयर बाजार में बड़ी गिरावट के बाद अक्टूबर में एफआईआई निवेश, कच्चा तेल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।

मुंबई, 3 अक्टूबर आलम की खबर: भारतीय शेयर बाजार के लिए सितंबर का महीना काफी दबाव वाला रहा। निफ्टी 50 में सितंबर के दौरान करीब 6.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इसके साथ ही बाजार में लगातार आठ सप्ताह तक साप्ताहिक गिरावट का सिलसिला बना रहा, जो करीब 25 वर्षों में सबसे लंबी ऐसी अवधि बताई जा रही है।

अक्टूबर की शुरुआत भी बाजार के लिए राहत भरी नहीं रही। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कच्चे तेल की ऊंची कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और रुपये पर दबाव जैसे कई कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी बड़ी चुनौती

भारतीय बाजार में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की बिकवाली को लेकर है। सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 4.1 अरब डॉलर की निकासी की। 2026 में अब तक उनका कुल आउटफ्लो करीब 28.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों ने सितंबर में करीब 8 अरब डॉलर का निवेश किया।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया है, लेकिन विदेशी पूंजी की लगातार निकासी बाजार की धारणा पर दबाव बनाए हुए है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले दिनों में विदेशी फंड का रुख बदलता है या नहीं।

कच्चे तेल की कीमत पर बाजार की नजर

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।

हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास या उससे ऊपर कारोबार करता रहा है। भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ने से बाजार में चिंता भी बढ़ी है।

यदि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो इससे रुपये, महंगाई और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव की आशंका बाजार में बनी रह सकती है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये का दबाव

अमेरिका में 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में तेज बढ़ोतरी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बन गई है। ऊंची अमेरिकी यील्ड से वैश्विक निवेशकों के लिए डॉलर आधारित बॉन्ड और अन्य सुरक्षित परिसंपत्तियां अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकती हैं। इसका असर उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ सकता है।

दूसरी ओर रुपये में कमजोरी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। कच्चे तेल की ऊंची कीमत और विदेशी पूंजी की निकासी मिलकर मुद्रा बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना सकती है।

लगातार आठ हफ्तों की गिरावट

निफ्टी 50 और सेंसेक्स में लगातार आठवें सप्ताह भी गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान निफ्टी में कुल करीब 8.7 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 8.4 प्रतिशत की साप्ताहिक अवधि वाली गिरावट रही।

1 अक्टूबर को निफ्टी 50 करीब 0.88 प्रतिशत गिरकर 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 570.59 अंक की गिरावट के साथ 71,909.70 पर बंद हुआ।

इस लगातार कमजोरी ने निवेशकों के सामने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अक्टूबर में बाजार को स्थिरता कब मिलती है और किन संकेतों से सुधार की शुरुआत होती है।

दूसरी तिमाही के नतीजे होंगे महत्वपूर्ण

अक्टूबर में कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। निवेशक कंपनियों की बिक्री, मुनाफे, मार्जिन, मांग और भविष्य के अनुमान पर नजर रखेंगे।

अगर कंपनियों के नतीजे बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप रहते हैं और घरेलू मांग मजबूत दिखाई देती है तो कुछ क्षेत्रों में निवेशकों का भरोसा वापस आ सकता है। वहीं कमजोर नतीजे बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।

घरेलू निवेशकों का सहारा

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है। सितंबर में डीआईआई की खरीदारी ने एफआईआई आउटफ्लो के एक हिस्से को संतुलित किया।

इसके बावजूद बाजार की दिशा केवल घरेलू खरीदारी से तय नहीं होगी। वैश्विक ब्याज दरें, डॉलर, कच्चा तेल, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और विदेशी पूंजी का प्रवाह आने वाले समय में अहम भूमिका निभाएंगे।

अक्टूबर में किन संकेतों पर नजर रखेंगे निवेशक

अक्टूबर में शेयर बाजार की दिशा समझने के लिए निवेशकों की नजर मुख्य रूप से इन संकेतकों पर रह सकती है—

एफआईआई की खरीदारी या बिकवाली

कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत

अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड

रुपये की डॉलर के मुकाबले चाल

कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे

घरेलू मांग और आर्थिक आंकड़े

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति से जुड़े संकेत

वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम

इनमें से किसी भी प्रमुख कारक में बड़ा बदलाव बाजार में तेज उतार-चढ़ाव पैदा कर सकता है।

क्या अक्टूबर में तुरंत बड़ी रिकवरी आएगी?

बाजार में लगातार गिरावट के बाद कुछ निवेशकों को सुधार की उम्मीद है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। विदेशी पूंजी की निकासी, ऊंचा कच्चा तेल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड जैसे जोखिम अभी समाप्त नहीं हुए हैं। वहीं घरेलू निवेश और कंपनियों की कमाई से जुड़ी उम्मीदें बाजार को सहारा दे सकती हैं।

इसलिए अक्टूबर में बाजार में एकतरफा तेजी या तेज गिरावट के बजाय उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। निवेशकों के लिए वैश्विक संकेतकों और कंपनियों के वास्तविक वित्तीय प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।

बाजार के लिए आगे की तस्वीर

सितंबर की गिरावट और लगातार आठ सप्ताह की कमजोरी ने भारतीय शेयर बाजार को महत्वपूर्ण मोड़ पर ला दिया है। अक्टूबर में एफआईआई का रुख, कच्चे तेल की कीमत, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की स्थिति और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की धारणा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

ऐसे माहौल में बाजार की दिशा किसी एक संकेतक से तय होने के बजाय घरेलू और वैश्विक कई कारकों के संयुक्त प्रभाव से तय हो सकती है। निवेशकों के लिए तेजी या गिरावट के बजाय कंपनियों की कमाई, वित्तीय स्थिति और बाजार जोखिम को समझना अधिक महत्वपूर्ण रहेगा।

यह भी पढ़ें:

Alam Ki Khabar पर देश-दुनिया, बिहार, मौसम, कारोबार और अन्य महत्वपूर्ण खबरों की ताजा अपडेट पढ़ें।

निवेशकों के लिए जरूरी डिस्क्लेमर

यह खबर केवल सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्य से है। इसमें दी गई जानकारी को किसी शेयर, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश साधन को खरीदने, बेचने या अपने पास बनाए रखने की व्यक्तिगत सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिम के अधीन है और निवेश की गई पूंजी में नुकसान हो सकता है।

किसी भी निवेश से पहले अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखें। आवश्यकता होने पर SEBI-registered investment adviser से व्यक्तिगत वित्तीय सलाह लें। आलम की खबर किसी निवेश के लाभ या रिटर्न की गारंटी नहीं देता।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *